साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का शहीद हेमंत करकरे के लिये दिए गये बयानों का समर्थन नहीं किया जा सकता, नेताओं को अपने शब्दों की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिये:

मुंबई पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद मुंबई ATS के पूर्व चीफ हेमंत करकरे पर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने अपने दिए बयान पर हालांकि माफ़ी मांग ली है. पर यह एक बिना वजह अपने ऊपर लिया गया विवाद था जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी वो भी खासकर जब कोई अपनी राजनीतिक पारी की तुरंत शुरुआत कर रहा हो.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर अत्याचार किया गया था यह सर्व विदित है, संभवतः स्वर्गीय हेमंत करकरे का उस तथाकथित किये गये अत्याचार में सलिप्तता भी रही हो पर उससे मुंबई हमले में उनके साहस और आतंकवादियों को रोकने में उनकी क़ुरबानी को तनिक भी कम नहीं किया जा सकता, देश ने उस भयानक हमले में मुंबई के जांबाज़ पुलिस वालों को उन नरपिशाचों से जूझते हुए देखा था, दर्जनों पुलिसवालों ने अपनी जान कि परवाह न करते हुए अपनी जान मुंबई और देश को बचाने के लिये हँसते हँसते न्योछावर कर दी.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की व्यक्तिगत तौर पर हेमंत करकरे के प्रति नफ़रत हो सकती है, और उनकी पीड़ा समझी जा सकती पर इन सब बातों से शहीद की शहीदी कम नहीं हो सकती. साध्वी प्रज्ञा को यह समझना चाहिए कि अब वो एक राष्ट्रीय पार्टी की सदस्य हैं और लोकसभा की भोपाल सीट की प्रत्याशी भी, उनको ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए जो भाजपा और उनकी छवि को नकारात्मक रूप से पेश करे, और उनके इस तरह के बयानों का किसी भी तरह से समर्थन नहीं किया जा सकता है.

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