इतनी बेइज्जती कैसे बर्दाश्त करते हैं चौधरी अजीत सिंह ?, मायावती के साथ मंच शेयर करने के लिए जूते उतरवाए गए, जबकि मायावती खुद पहने हुई थीं:

देश का जाट समुदाय अपने अजेय स्वाभिमान और उच्च चारित्रिक गुणों के लिए जाना जाता है, अपने स्वाभिमान के लिए जाट किसी भी हद तक जा सकता है, पर मायावती के मंच पर जो कुछ हुआ वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था, अजीत सिंह इसको कैसे बर्दाश्त कर पाए होंगे पता नहीं पर आज स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह होते तो बेहद दुखी होते.

जैसा की सबको पता है कि महागठबंधन की रैलियों, कार्यक्रमों से लेकर स्टेज पर कौन-कहां बैठेगा, कौन-कब बोलेगा ये सब मायावती तय कर रही हैं, एक तरह से उन्होंने अखिलेश यादव को तो हाशिये पर धकेल दिया है और खुद वह पूरे गठबंधन की धुरी बन गयी हैं, गठबंधन में यह उनकी हनक ही है कि एक कार्यक्रम में मंच साझा करने के लिए आरएलडी चीफ अजित सिंह को जूते उतारने पड़ गए.

पहले चरण के चुनाव से पहले सहारनपुर के देवबंद में हुई महागठबंधन की रैली में मायावती के प्रोटोकॉल के अनुसार आरएलडी अध्यक्ष अजित सिंह को बेइज्जती का सामना करना पड़ा, दरअसल अजित सिंह ने जैसे ही मायावती और अखिलेश यादव के पीछे-पीछे मंच पर चढ़ना शुरू किया, तभी बीएसपी के एक को-ऑर्डिनेटर ने अजित सिंह से जूते उतारने के लिए कह दिया, उसने आरएलडी अध्यक्ष को बताया कि मायावती को पसंद नहीं है कि मंच पर उनके सामने कोई जूते पहनकर बैठे, सिवाय खुद, उल्लेखनीय यह है की अखिलेश यादव ने भी अपने जूते नहीं उतारे थे.

सोचने वाली बात यह है कि आखिर अपने साथ हो रहे इस दोयम दर्जे के सम्मान के साथ अजीत सिंह कैसे इस गठबंधन के साथ रह पा रहे हैं यह समझ से परे है. क्या अजीत सिंह आज एक गली नुक्कड़ के एक जिला स्तर के बराबर हो चुके हैं ?

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