भ्रष्टाचार की देवी अपने आप को भगवान् राम और महात्मा गांधी के बराबर समझती हैं:

मायावती ने सुप्रीम कोर्ट में एक अजीब सी और आपत्तिजनक दलील दी है, मोहतरमा फरमाती हैं कि अगर भगवान् राम और महात्मा गाँधी की मूर्ती लग सकती है तो उनकी क्यों नहीं.

क्या छिछोरा और भोथरा तर्क है, जो अपने जीवन भर बसपा का टिकट बेच बेच कर अपनी तिजोरियों भरने का काम करती रही हों, जिन्होंने अपने शासन काल में भ्रष्टाचार का ऐसा तंत्र विकसित कर दिया हो जहां लगभग हर सरकारी पद नीलम किया जाता रहा हो वो आज अपने देवी बनने का सपना पाले बैठी हैं.

उनके वोटरों को भी अब सोचना होगा कि आखिर वो किस तरह के व्यक्ति को वोट दे रहे हैं जो खुद ही अपने कुकर्मो पर आत्ममुग्ध है और आखिर वो किस तरह की विक्षिप्त परंपरा को जन्म दे रही जिसका ईमानदारी, शुचिता और गरिमा से कोई लेना देना ही न हो

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